पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि काश 2015 में जब मैंने आपदा के मानकों को रिवाइज किया था तो उस समय भवन क्षति के स्थिति में कम से कम ₹3,00,000 मुआवजा राशि रखी जानी चाहिये थी, पर्वतीय क्षेत्र में ₹3,00,000 रूपया और मैदानी क्षेत्रों में ₹2,00,000 से लेकर ₹2,50,000 के बीच में। आज मैं जहां भी जा रहा हूंँ तो लोगों की क्षति और क्षति के मुकाबले दी जा रही राशि की न्यूनता को देखकर बहुत दु:खी हूंँ। मानव क्षति पर यह हमने बढ़ाकर के ₹5,00,000 किया था। हमने गृह सामग्री से लेकर के घर की मिट्टी, जमीन की मिट्टी, फसलों आदि के सारे मानक बढ़ाये थे, ताकि लोगों को अच्छा मुआवजा मिल सके। लेकिन मैं समझता हूंँ कि ये मुआवजा राशि को बढ़ाना एक अधूरा काम है हमारा, जिसको आगे कांग्रेस पूरा करे इस हेतु मैं अपने साथियों से बातचीत करूंगा।