विमानों को नहीं पकड़ पायेंगे राडार, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी की नई खोज

ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी की नई खोज

विमानों को नहीं पकड़ पायेंगे राडार

देहरादून, 29 अगस्त। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जो विमानों को राडार की पकड़ से बाहर कर देगी। केंद्र सरकार ने इस अनुपम खोज का पेटेंट भी दे दिया है। यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों डॉ. वारिज पंवार और डॉ. विकास राठी ने यह खोज की है।

ग्राफिक एरा के वैज्ञानिक डॉ वारिज पंवार ने बताया कि इलेक्ट्रो मैगनेटिक इंटरफेरेंस (EMI) शील्डिंग फिल्म के रूप में एक पतली परत तैयार की गई है, यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (EMI) से बचाने की विशेषता रखती है। यह परत किसी भी वस्तु पर चढ़ा दी जाये, तो 12 से 18 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी रेंज (केयू बैंड) पर आने वाली किरणों को यह सोख लेती है। राडार भी इसी फ्रीक्वेंसी रेंज पर काम करते हैं। किसी विमान पर यह परत चढ़ा दी जाये, तो किसी भी राडार से छोड़ी जाने वाली किरणें इस पर पड़ने के बाद वापस नहीं लौटेंगी। ये परत उन्हें सोख लेगी।

डॉ वारिज ने बताया कि अपने साथी वैज्ञानिक डॉ. विकास राठी के साथ के विभाग की सेंसर्स एंड एक्चुएटर्स लैब में कई वर्षों के प्रयोगों के बाद यह कामयाबी मिली है। इस प्रयोगशाला में पहले भी बायोडिग्रेडेबल मटीरियल्स और एनर्जी हार्वेस्टिंग मटीरियल्स के क्षेत्र में कई बड़ी खोज की गई हैं, जिनके पेटेंट मिल चुके हैं। गन्ने के रस से मैम्ब्रेन बनाने जैसी कई खोजें करके पेटेंट हासिल कर चुके डॉ वारिज पंवार ने कहा कि उनका साझा लक्ष्य ऐसे शोध करना है, जो देश, समाज और उद्योग को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा सकें। यह खोज इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

खोजकर्ता वैज्ञानिक डॉ विकास राठी ने कहा कि यह बड़ी खोज और इसके लिए केंद्र सरकार से मिला पेटेंट हमारे कई वर्षों के शोध कार्य को मान्यता मिलना है। यह तकनीक भविष्य के सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के विकास में अहम योगदान देगी।

खोजकर्ताओं ने कहा कि इस खोज को पेंट की तरह किसी भी सतह पर चढ़ाया जा सकता है। इसकी परत रक्षा एवं एयरोस्पेस के क्षेत्र में राडार, गाइडेड मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन (डीटीएच, वी-सैट, मोबाइल सैटेलाइट लिंक), एवियोनिक्स (एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशन, इन-फ्लाइट इंटरनेट) तथा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स (फाइव जी तकनीक और माइक्रोवेव इमेजिंग) जैसे क्षेत्रों में बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ कमल घनशाला ने इस खोज को देश के लिए एक बेहतरीन उपहार बताते हुए दोनों वैज्ञानिकों को बधाई दी। डॉ घनशाला ने कहा कि यहां उपलब्ध दुनिया की सबसे नई टेक्नोलॉजी और ग्राफिक एरा का माहौल लगातार आगे बढ़ने और कुछ नया कर गुजरने की प्रेरणा देता है। इसी के कारण टाईफाईड डायग्नोस करने की नई तकनीक, एआई से जुड़ी व्यायाम को सुखद बनाने वाली मशीन, शरीर और इमारतों में होने वाले सूक्ष्म बदलावों पर एलर्ट करने वाली मेम्ब्रेन, पेड़-पत्तों से अधिक औषधीय तत्व निकालने की तकनीक, ग्रीन टी से फंगल रोधी दवा बनाने का फार्मूला, शारीरिक गतिविधियों से बिजली उत्पादन की तकनीक जैसी खोजें ग्राफिक एरा की प्रयोगशालाओं में हुई है और इन सबके पेटेंट ग्राफिक एरा को मिल चुके हैं। केंद्र सरकार से 20 वर्षों के लिए इस खोज का पेटेंट मिलने से हमारे वैज्ञानिक बहुत उत्साहित हैं। उत्तराखंड की सरजमीं पर हुई इस खोज ने राज्य को गौरवांवित किया है।

 

 

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